हरे-भरे जंगल के किनारे एक सुंदर सा मैदान था। वहाँ ऊँचे-ऊँचे पेड़, रंग-बिरंगे फूल और मीठी हवा बहती रहती थी। उसी जंगल में एक नन्ही, फुर्तीली और बहुत समझदार गिलहरी रहती थी। उसका नाम था सिया। सिया की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह मेहनती होने के साथ-साथ बहुत ही दयालु थी।
सिया हर सुबह सूरज निकलते ही अपने काम में लग जाती। वह पेड़ों पर चढ़कर एक-एक करके अखरोट और बलूत इकट्ठा करती। उसने पेड़ के नीचे अपने छोटे से घर के पास ढेर सारा अनाज जमा कर रखा था। सिया जानती थी कि सर्दियों में खाना मिलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए वह पहले से तैयारी करती थी।
हालाँकि सिया के पास बहुत सारे मेवे थे, फिर भी उसके दिल में लालच नहीं था। वह जानती थी कि असली खुशी सिर्फ अपने लिए जमा करने में नहीं, बल्कि दूसरों की मदद करने में है।
🐦 छोटी चिड़िया पिंकी
उसी जंगल में एक नन्ही पीली चिड़िया रहती थी। उसका नाम था पिंकी। पिंकी बहुत ही चंचल और खुशमिज़ाज थी। वह पूरे जंगल में उड़ती, गाने गाती और सभी जानवरों की दोस्त थी। लेकिन उस दिन पिंकी बहुत उदास थी।
कई दिनों से बारिश नहीं हुई थी। कीड़े-मकोड़े कम हो गए थे और पिंकी को खाने के लिए कुछ नहीं मिल रहा था। उसकी छोटी सी चोंच कमजोर लग रही थी और आँखों में चमक नहीं थी।
उड़ते-उड़ते पिंकी सिया के पेड़ के पास पहुँची। उसने देखा कि सिया के पास ढेर सारे अखरोट हैं। पिंकी ने हिम्मत करके कहा, “सिया, मुझे बहुत भूख लगी है। क्या तुम मेरी मदद कर सकती हो?”
बाँटने का फैसला
सिया ने पिंकी की ओर देखा। उसके मन में एक पल के लिए विचार आया—
“अगर मैंने दे दिया तो मेरे लिए कम हो जाएगा।”
लेकिन अगले ही पल उसने पिंकी की हालत देखी। वह कमजोर थी, भूखी थी और मदद की उम्मीद में खड़ी थी।
सिया मुस्कुराई और बोली, “पिंकी, दोस्ती में हिसाब नहीं देखा जाता। ये अखरोट सिर्फ मेरे नहीं हैं, हम दोनों के हैं।”
सिया ने अपने हाथों में कुछ अखरोट उठाए और पिंकी को दे दिए। पिंकी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसने खुशी से चहचहाते हुए कहा, “धन्यवाद सिया! तुम बहुत अच्छी हो। सच में, बाँटना हमें खुश करता है।”
सिया के दिल में एक अलग ही गर्माहट महसूस हुई। उसे लगा जैसे उसकी खुशी दोगुनी हो गई हो।
जंगल में फैलती सीख
अगले दिन पिंकी ने पूरे जंगल में सिया की दयालुता की कहानी सुनाई। खरगोश, हिरण, बंदर और कछुआ—सब सिया की तारीफ करने लगे। लेकिन सिया को तारीफ से ज़्यादा खुशी इस बात की थी कि उसने किसी की मदद की।
कुछ दिन बाद जंगल में एक और मुश्किल आई। इस बार तेज़ ठंड पड़ने लगी। कई जानवरों के पास खाना नहीं था। सिया ने सबको अपने पेड़ के नीचे बुलाया और कहा, “हम सब मिलकर एक-दूसरे की मदद करेंगे। जो मेरे पास है, वो हम सबका है।”
सभी जानवरों ने अपनी-अपनी चीज़ें साझा कीं। किसी ने फल दिए, किसी ने बीज, तो किसी ने सूखी घास। जंगल में फिर से खुशी लौट आई।
मुश्किल समय की परीक्षा
एक दिन अचानक तेज़ तूफान आया। कई पेड़ों से फल गिर गए और कुछ जानवरों के घर टूट गए। सिया का भी अनाज कुछ हद तक बिखर गया। अब सिया के पास पहले जितना खाना नहीं बचा था।
पिंकी ने यह देखा और तुरंत बोली, “सिया, अब मेरी बारी है। तुमने मेरी मदद की थी, अब मैं तुम्हारी मदद करूंगी।”
पिंकी ने बाकी जानवरों को बुलाया। सबने मिलकर सिया के लिए खाना इकट्ठा किया। किसी ने बीज दिए, किसी ने जामुन, तो किसी ने शहद।
सिया की आँखें भर आईं। उसने महसूस किया कि जो वह दूसरों को देती रही, वही खुशी आज कई गुना होकर लौट आई।
सच्ची खुशी का रहस्य
सिया ने सबको देखकर कहा, “आज मुझे समझ आया कि बाँटना कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो पूरी दुनिया हमारी मदद के लिए खड़ी हो जाती है।”
जंगल में फिर से हँसी-खुशी गूंजने लगी। पिंकी ने उड़ते हुए आसमान में एक प्यारा सा गीत गाया। सूरज की किरणें पेड़ों के बीच से झाँक रही थीं और पूरा जंगल प्रेम से भर गया था।
कहानी की सीख
उस दिन के बाद जंगल में एक नियम बन गया—
कोई भी अकेला नहीं रहेगा, सब एक-दूसरे की मदद करेंगे।
सिया और पिंकी की दोस्ती पूरे जंगल के लिए मिसाल बन गई।
Moral / नैतिक शिक्षा
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बाँटना हमें छोटा नहीं, बल्कि बड़ा बनाता है।
सच्ची खुशी दूसरों को खुश करने में है।




